Saturday, 16 May 2015

मैं -समाज

हर मजहब के लोगों से बस मैं यह कहता हूँ कि गुस्ताखी मेरी माफ़ करें ,गंदगी को आओ साफ़ करें।
झूठे वादे मैं कभी बोलता नहीं ,इंसान और उसके काम को कभी मैं तोलता नहीं।
मेहनत -मजदूरी और परिश्रम से मैं कभी डरता नहीं ,झूठी शान ओ शौकत मै करता नहीं।
सत्ता और धन-दौलत पर मैं  मरता नहीं ,सच बोलने से कभी मुकरता नहीं।
बात मैं करता हूँ थोपता नहीं ,काम मैं करता हूँ रोकता नहीं।
जीने-मरने की कभी सोचता नहीं ,पॉँव धोकर कभी पोछता नहीं।
बात बुरी,जो मैं करता नहीं ,दुनिया क्या सोचेगी इससे मैं डरता नहीं।
हवा में ज्यादा मैं उड़ता नहीं ,जमीन पर कभी पैर पड़ता नहीं।
यूही किसी से मै झगड़ता नहीं ,दूसरों के मामले में जल्दी कभी मैं पड़ता नहीं।

No comments:

Post a Comment