Saturday, 16 May 2015

अपने सपने

जिंदगी में नए मोड़ आ जाते हैं , रास्ते यूँही बदल जाते हैं।
हर दिन सपने बदल जाते हैं ,दूर होकर जब अपने याद आते हैं।
अपनों की कीमत सपनों से बढ़कर होती है ,सपनों की जरूरत अपनों के लिए ही होती है।
जब सपने दूर होते हैं  तब अपने काम आते हैं ,अपनों के दूर होते ही सपने नाकाम कहलाते हैं।
अगर सपनों के हिसाब से आप अपने बनाते हैं तो आप नए अपनों के नए सपनों का जरिया बन जाते हैं।
आप खुद में कुछ कम सा पाते हैं और सब छोड़ छाड़ के खुद को ढूंढने की राह में निकल जाते हैं।
क्यूंकि जब अपने दूर हो जाते हैं तब सपने काम नहीं आते हैं लेकिन सपने अपनों के लिए ही आते हैं।

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