Friday, 27 August 2021

लम्हें

ये लम्हें जो बिताये हैं साथ तेरे, तू बता! इन्हें कैद करलूं कि जाने दूं!!

Friday, 28 February 2020

रोकूंगा नहीं

रोकूंगा नहीं!🙏
बह गए आंसुओं को रोकुंगा नहीं
कम होती सांसों को राेकुंगा नहीं
निकल गई आह मैं रोकुंगा नहीं
चढ़ गया चांद ए आसमां मैं राेकुंगा नहीं
थम गयी जिंदगी मैं रोकूंगा नहीं।
बढ़ गई उम्र मैं रोकूंगा नहीं
उम्र को दी हर वक्त ए मोहलत मैं रोकूंगा नहीं
दिल - धड़कन ए धरती को मै रोकूंगा नहीं 
मन मंदिर-मजार ए मोहब्बत को मैं रोकूंगा नहीं
निकल गई जो बात सर के ऊपर मैं रोकूंगा नहीं।

चौपट चाट खावट अडी आंपड़ चौखट

उक्ताट चिक्ताट उडुक चिदक्ताट।
Uktat chiktat udukchidaktat.
उठताट उड़ताट फुरुक फुरुक्ताट।
Uthtat udtat furukfuruktat.
चलताट फिरताट सिरक्सरक्ताट।
Chaltat firtat siraksaraktat.
गुप्ताट छिपटत छुपंछुपाहट।
Guptat chhipatat chhipanchhipahat.
मन मगर मरघट मरा केवट।
Man magar marghat mara kewat.
केवट मन मरा मगर मरघट मय महकावट।
Kewat man mara magar marghatmay mehkawat.
सूखट चौखट पे पनघट।
Sookhat chaukhat pe pankghat.
पानी प्याऊ पिलावट।
Pani pyau pilawat.

Saturday, 19 January 2019

निशान

जिंदगी न हि इतनी मुश्किल न हि इतनी आसान।
कुछ पलों में गुजरती सी कुछ पलों में रह जाती है।
सोच के हर दायरे को सब्र में समेटती।
हर पल के निशां वो बीते समय के साथ छोड़ जाती है।

Friday, 25 December 2015

आँसू

रोया तो बहुत था मैं ! 😢 पर आँसू नहीं थे आँखों में। गहराइयों में उतरकर सूख गए जो पलकों पर।😊📜✍

Monday, 1 June 2015

रुकना और चलना सिर्फ एक दस्तूर

रुक गयी दुनिया

रुका है आसमां।

जहाँ मैं देखूँ 

वहां बंधा है समां।

रुक रुक के चलता है ये,

रुक रुक के करता ये काम ।

जिंदगी के भँवर में 

फंसा जाने कहाँ।

Wednesday, 20 May 2015

मैं हूँ कि नहीं

तेरी आँखों में देखकर करीब आने का दिल करता है
तेरे करीब आने पर तुझमें डूब जाने का दिल करता है
तेरा हि बस हो जाने का दिल करता है।
तेरी आँखों की रंगीन मस्तियाँ ,तेरे होठों की नर्मियाँ।
तेरी साँसों का हल्कापन ,तेरी आँखों में गीलापन।
मुझे मजबूर करता है।
अगर मैं चलते चलते रुक जाऊं ,या रुक-रुक कर मैं चलूँ।
मैं अगर चीज़ों को भूल जाऊं या फिर याद करने की कोशिश करूँ।
अगर मैं अलग हि दुनिया में खो जाऊं या फिर इस दुनिया में होकर भी न रहूँ।
अगर मेरा दिल ,मेरी रूह ,मेरा जिस्म ,मेरा मन ,मेरी हर एक चीज़ , जब
मुझमें होकर भी मुझमें न हो। सबकुछ ही  मुझको मेरी नज़र से अलग दिखे।
जब मेरा मन मुझसे कुछ कहने लगे ,मेरा दिल मुझसे कुछ बातें करने लगे।
मेरा गला जब सूखने लगे ,दिल की हर एक धड़कन जब दिल से बातें करने लगे।
मेरा अंग अंग मुझे अलग सा लगने लगे। मेरा रोम रोम जब धड़कने लगे।
जब मेरी पुकार मुझे ही पुकारने लगे। तब मैं जियूँ तो किस वजह में जियूं।
क्या है ये?
ये मैं हूँ ,ये मुझमे है। ये मुझसे है। ये मेरा है।
मैं ही इसकी वजह हूँ और मैं ही इसका वजूद भी,
तो क्या सिर्फ मुझसे ही इसकी उपज है और मुझमें ही ये सब है।
क्या कुछ और नहीं , क्या कोई और नहीं है ?
है न……… प्यार ,सपने(dreams),मेरी परिकल्पना ,मेरी उमंग ,मेरा विश्वास ,मेरा भरोसा
मेरा दिल,मेरी जान ,मेरी परछाई ,मेरा मान ,मेरा सम्मान ,मेरा ईमान ,मेरा नाम ,मेरी पहचान।
मैं हूँ भी कि नहीं ,खो गया हूँ मैं सपनों में सो गया हूँ मैं।