रोया तो बहुत था मैं ! 😢 पर आँसू नहीं थे आँखों में। गहराइयों में उतरकर सूख गए जो पलकों पर।😊📜✍
Friday, 25 December 2015
Monday, 1 June 2015
रुकना और चलना सिर्फ एक दस्तूर
रुक गयी दुनिया
रुका है आसमां।
जहाँ मैं देखूँ
वहां बंधा है समां।
रुक रुक के चलता है ये,
रुक रुक के करता ये काम ।
जिंदगी के भँवर में
फंसा जाने कहाँ।
Wednesday, 20 May 2015
मैं हूँ कि नहीं
तेरी आँखों में देखकर करीब आने का दिल करता है
तेरे करीब आने पर तुझमें डूब जाने का दिल करता है
तेरा हि बस हो जाने का दिल करता है।
तेरी आँखों की रंगीन मस्तियाँ ,तेरे होठों की नर्मियाँ।
तेरी साँसों का हल्कापन ,तेरी आँखों में गीलापन।
मुझे मजबूर करता है।
अगर मैं चलते चलते रुक जाऊं ,या रुक-रुक कर मैं चलूँ।
मैं अगर चीज़ों को भूल जाऊं या फिर याद करने की कोशिश करूँ।
अगर मैं अलग हि दुनिया में खो जाऊं या फिर इस दुनिया में होकर भी न रहूँ।
अगर मेरा दिल ,मेरी रूह ,मेरा जिस्म ,मेरा मन ,मेरी हर एक चीज़ , जब
मुझमें होकर भी मुझमें न हो। सबकुछ ही मुझको मेरी नज़र से अलग दिखे।
जब मेरा मन मुझसे कुछ कहने लगे ,मेरा दिल मुझसे कुछ बातें करने लगे।
मेरा गला जब सूखने लगे ,दिल की हर एक धड़कन जब दिल से बातें करने लगे।
मेरा अंग अंग मुझे अलग सा लगने लगे। मेरा रोम रोम जब धड़कने लगे।
जब मेरी पुकार मुझे ही पुकारने लगे। तब मैं जियूँ तो किस वजह में जियूं।
क्या है ये?
ये मैं हूँ ,ये मुझमे है। ये मुझसे है। ये मेरा है।
मैं ही इसकी वजह हूँ और मैं ही इसका वजूद भी,
तो क्या सिर्फ मुझसे ही इसकी उपज है और मुझमें ही ये सब है।
क्या कुछ और नहीं , क्या कोई और नहीं है ?
है न……… प्यार ,सपने(dreams),मेरी परिकल्पना ,मेरी उमंग ,मेरा विश्वास ,मेरा भरोसा
मेरा दिल,मेरी जान ,मेरी परछाई ,मेरा मान ,मेरा सम्मान ,मेरा ईमान ,मेरा नाम ,मेरी पहचान।
मैं हूँ भी कि नहीं ,खो गया हूँ मैं सपनों में सो गया हूँ मैं।
तेरे करीब आने पर तुझमें डूब जाने का दिल करता है
तेरा हि बस हो जाने का दिल करता है।
तेरी आँखों की रंगीन मस्तियाँ ,तेरे होठों की नर्मियाँ।
तेरी साँसों का हल्कापन ,तेरी आँखों में गीलापन।
मुझे मजबूर करता है।
अगर मैं चलते चलते रुक जाऊं ,या रुक-रुक कर मैं चलूँ।
मैं अगर चीज़ों को भूल जाऊं या फिर याद करने की कोशिश करूँ।
अगर मैं अलग हि दुनिया में खो जाऊं या फिर इस दुनिया में होकर भी न रहूँ।
अगर मेरा दिल ,मेरी रूह ,मेरा जिस्म ,मेरा मन ,मेरी हर एक चीज़ , जब
मुझमें होकर भी मुझमें न हो। सबकुछ ही मुझको मेरी नज़र से अलग दिखे।
जब मेरा मन मुझसे कुछ कहने लगे ,मेरा दिल मुझसे कुछ बातें करने लगे।
मेरा गला जब सूखने लगे ,दिल की हर एक धड़कन जब दिल से बातें करने लगे।
मेरा अंग अंग मुझे अलग सा लगने लगे। मेरा रोम रोम जब धड़कने लगे।
जब मेरी पुकार मुझे ही पुकारने लगे। तब मैं जियूँ तो किस वजह में जियूं।
क्या है ये?
ये मैं हूँ ,ये मुझमे है। ये मुझसे है। ये मेरा है।
मैं ही इसकी वजह हूँ और मैं ही इसका वजूद भी,
तो क्या सिर्फ मुझसे ही इसकी उपज है और मुझमें ही ये सब है।
क्या कुछ और नहीं , क्या कोई और नहीं है ?
है न……… प्यार ,सपने(dreams),मेरी परिकल्पना ,मेरी उमंग ,मेरा विश्वास ,मेरा भरोसा
मेरा दिल,मेरी जान ,मेरी परछाई ,मेरा मान ,मेरा सम्मान ,मेरा ईमान ,मेरा नाम ,मेरी पहचान।
मैं हूँ भी कि नहीं ,खो गया हूँ मैं सपनों में सो गया हूँ मैं।
Saturday, 16 May 2015
मैं -समाज
हर मजहब के लोगों से बस मैं यह कहता हूँ कि गुस्ताखी मेरी माफ़ करें ,गंदगी को आओ साफ़ करें।
झूठे वादे मैं कभी बोलता नहीं ,इंसान और उसके काम को कभी मैं तोलता नहीं।
मेहनत -मजदूरी और परिश्रम से मैं कभी डरता नहीं ,झूठी शान ओ शौकत मै करता नहीं।
सत्ता और धन-दौलत पर मैं मरता नहीं ,सच बोलने से कभी मुकरता नहीं।
बात मैं करता हूँ थोपता नहीं ,काम मैं करता हूँ रोकता नहीं।
जीने-मरने की कभी सोचता नहीं ,पॉँव धोकर कभी पोछता नहीं।
बात बुरी,जो मैं करता नहीं ,दुनिया क्या सोचेगी इससे मैं डरता नहीं।
हवा में ज्यादा मैं उड़ता नहीं ,जमीन पर कभी पैर पड़ता नहीं।
यूही किसी से मै झगड़ता नहीं ,दूसरों के मामले में जल्दी कभी मैं पड़ता नहीं।
झूठे वादे मैं कभी बोलता नहीं ,इंसान और उसके काम को कभी मैं तोलता नहीं।
मेहनत -मजदूरी और परिश्रम से मैं कभी डरता नहीं ,झूठी शान ओ शौकत मै करता नहीं।
सत्ता और धन-दौलत पर मैं मरता नहीं ,सच बोलने से कभी मुकरता नहीं।
बात मैं करता हूँ थोपता नहीं ,काम मैं करता हूँ रोकता नहीं।
जीने-मरने की कभी सोचता नहीं ,पॉँव धोकर कभी पोछता नहीं।
बात बुरी,जो मैं करता नहीं ,दुनिया क्या सोचेगी इससे मैं डरता नहीं।
हवा में ज्यादा मैं उड़ता नहीं ,जमीन पर कभी पैर पड़ता नहीं।
यूही किसी से मै झगड़ता नहीं ,दूसरों के मामले में जल्दी कभी मैं पड़ता नहीं।
भूख और भूल
इस देश में भूखे पेट बच्चों का सोना किसी माँ की भूल नहीं होती।
जब बच्चा बन जाये खिलौना। ..................................... ……।
अनजाने में की गयी भूल -भूल नहीं होती , हर बात की कोई तूल नहीं होती।
हर रोती हुई आँख जैसे गीली नहीं होती ,मजबूत इरादों की नींव कभी ढीली नहीं होती।
नस-नस में दौड़ते हुए खून की कोई बूँद नीली नहीं होती,सोते हुए को जिंदगी कभी जीनी नहीं होती।
शुगर फ्री में कभी चीनी नहीं होती,हर मर्ज़ में दवा-दारू पीनी नहीं होती।
हर सच का झूठ से बड़ा होना जरूरी नहीं होता ,इंसानियत कभी टाई -कोट पहने ऐसा जरूरी नहीं होता।
हर रोता हुआ शख़्श (दिल)आँसूं बहाये जरूरी नहीं होता , रास्ते का कोई रोड़ा हो ऐसा भी जरूरी नहीं होता।
सफ़ेद पोशाक और काली पोशाक सच-झूठ का फैसला नहीं होता।
रात के बाद दिन और दिन का मतलब अँधेरा नहीं होता।
माँ के पेट में कभी भूख से बच्चा जोर -२ से रोया नहीं होता। जो सोता रहता है वो कभी ऊंचाई पर नहीं होता।
सच छोटा और झूठ बड़ा नहीं होता ,सही -गलत राह पर चलने वाला मुसाफिर हि नहीं होता।
सूखी हुई जमीन पर पानी-पौधा नहीं होता। जिंदगी पैसा और पैसा जिंदगी की कहानी नहीं होता।
बिना डर और आतंक के कोइ सुनामी नहीं होता। सफलता की राह पर बिना कदम बढ़ाये कोई तूफानी नहीं होता।दुकान में ग्राहक होता है कोई कव्वाली नहीं होता। इधर उधर से गुजरने वाला मावली नहीं होता।
शर्म से डूबा हुआ पानी पानी नहीं होता ,राजमहल में राजा होता है कोई भिकारी नहीं होता।
दुश्मन कभी जानी नहीं होता। हर अमीर ,पैसे वाला दानी नहीं होता।
बिना शिकार के कोई शिकारी नहीं होता। बिना भूख के कोई भिखारी नहीं होता।
i wanna say something as Rabindranath Tagore (SIR) said .......i always feel like that where the poem stand ,i'm trying to stand there :-
Into that heaven of freedom, my Father, let my country awake.
जब बच्चा बन जाये खिलौना। ..................................... ……।
अनजाने में की गयी भूल -भूल नहीं होती , हर बात की कोई तूल नहीं होती।
हर रोती हुई आँख जैसे गीली नहीं होती ,मजबूत इरादों की नींव कभी ढीली नहीं होती।
नस-नस में दौड़ते हुए खून की कोई बूँद नीली नहीं होती,सोते हुए को जिंदगी कभी जीनी नहीं होती।
शुगर फ्री में कभी चीनी नहीं होती,हर मर्ज़ में दवा-दारू पीनी नहीं होती।
हर सच का झूठ से बड़ा होना जरूरी नहीं होता ,इंसानियत कभी टाई -कोट पहने ऐसा जरूरी नहीं होता।
हर रोता हुआ शख़्श (दिल)आँसूं बहाये जरूरी नहीं होता , रास्ते का कोई रोड़ा हो ऐसा भी जरूरी नहीं होता।
सफ़ेद पोशाक और काली पोशाक सच-झूठ का फैसला नहीं होता।
रात के बाद दिन और दिन का मतलब अँधेरा नहीं होता।
माँ के पेट में कभी भूख से बच्चा जोर -२ से रोया नहीं होता। जो सोता रहता है वो कभी ऊंचाई पर नहीं होता।
सच छोटा और झूठ बड़ा नहीं होता ,सही -गलत राह पर चलने वाला मुसाफिर हि नहीं होता।
सूखी हुई जमीन पर पानी-पौधा नहीं होता। जिंदगी पैसा और पैसा जिंदगी की कहानी नहीं होता।
बिना डर और आतंक के कोइ सुनामी नहीं होता। सफलता की राह पर बिना कदम बढ़ाये कोई तूफानी नहीं होता।दुकान में ग्राहक होता है कोई कव्वाली नहीं होता। इधर उधर से गुजरने वाला मावली नहीं होता।
शर्म से डूबा हुआ पानी पानी नहीं होता ,राजमहल में राजा होता है कोई भिकारी नहीं होता।
दुश्मन कभी जानी नहीं होता। हर अमीर ,पैसे वाला दानी नहीं होता।
बिना शिकार के कोई शिकारी नहीं होता। बिना भूख के कोई भिखारी नहीं होता।
i wanna say something as Rabindranath Tagore (SIR) said .......i always feel like that where the poem stand ,i'm trying to stand there :-
Rabindranath Tagore
Rabindranath Tagore [1861-1941] was the greatest writer in modern Indian literature.
Where The Mind Is Without Fear
Where the mind is without fear and the head is held high
Where knowledge is free
Where the world has not been broken up into fragments
By narrow domestic walls
Where words come out from the depth of truth
Where tireless striving stretches its arms towards perfection
Where the clear stream of reason has not lost its way
Into the dreary desert sand of dead habit
Where the mind is led forward by thee
Into ever-widening thought and action
Where knowledge is free
Where the world has not been broken up into fragments
By narrow domestic walls
Where words come out from the depth of truth
Where tireless striving stretches its arms towards perfection
Where the clear stream of reason has not lost its way
Into the dreary desert sand of dead habit
Where the mind is led forward by thee
Into ever-widening thought and action
जिंदगी तेरा उधार
उधार तो तेरा है जिंदगी, जिसे चुकाना हम भूल गए।
जो खो दिया था बचपने में ,उसे पाना हम भूल गए।
याद आये हमारी तो याद कर लेना जी भरकर।
अगर याद न आये तो समझना ,हम याद कराना भूल गए।
मेरे दिल ने कहा ये मुझसे ,किसी की पलकों में न बसना
क्यूंकि पलकों में तो सिर्फ सपने बसते हैं।
जो खो दिया था बचपने में ,उसे पाना हम भूल गए।
याद आये हमारी तो याद कर लेना जी भरकर।
अगर याद न आये तो समझना ,हम याद कराना भूल गए।
मेरे दिल ने कहा ये मुझसे ,किसी की पलकों में न बसना
क्यूंकि पलकों में तो सिर्फ सपने बसते हैं।
अपने सपने
जिंदगी में नए मोड़ आ जाते हैं , रास्ते यूँही बदल जाते हैं।
हर दिन सपने बदल जाते हैं ,दूर होकर जब अपने याद आते हैं।
अपनों की कीमत सपनों से बढ़कर होती है ,सपनों की जरूरत अपनों के लिए ही होती है।
जब सपने दूर होते हैं तब अपने काम आते हैं ,अपनों के दूर होते ही सपने नाकाम कहलाते हैं।
अगर सपनों के हिसाब से आप अपने बनाते हैं तो आप नए अपनों के नए सपनों का जरिया बन जाते हैं।
आप खुद में कुछ कम सा पाते हैं और सब छोड़ छाड़ के खुद को ढूंढने की राह में निकल जाते हैं।
क्यूंकि जब अपने दूर हो जाते हैं तब सपने काम नहीं आते हैं लेकिन सपने अपनों के लिए ही आते हैं।
हर दिन सपने बदल जाते हैं ,दूर होकर जब अपने याद आते हैं।
अपनों की कीमत सपनों से बढ़कर होती है ,सपनों की जरूरत अपनों के लिए ही होती है।
जब सपने दूर होते हैं तब अपने काम आते हैं ,अपनों के दूर होते ही सपने नाकाम कहलाते हैं।
अगर सपनों के हिसाब से आप अपने बनाते हैं तो आप नए अपनों के नए सपनों का जरिया बन जाते हैं।
आप खुद में कुछ कम सा पाते हैं और सब छोड़ छाड़ के खुद को ढूंढने की राह में निकल जाते हैं।
क्यूंकि जब अपने दूर हो जाते हैं तब सपने काम नहीं आते हैं लेकिन सपने अपनों के लिए ही आते हैं।
कुछ आसान कुछ मुश्किल
अनजाने में की गयी भूल ,भूल नहीं होती। हर बात की कोई तूल होती।
खून की १ बूँद भी जैसे पानी नहीं होती ,हर बात में कहानी नहीं होती।
जब रोती हुईं आँखें गीली नहीं होती,तब दिल और दिमाग ने जख्मों की घूंटी पी ली नहीं होतीं।
जैसे डायबिटिक की चाय मीठी नहीं होती ,हर राहगीर की राह सीधी नहीं होती।
मौत को सामने खड़ा देख जवानों की पैंट गीली नहीं होती ,जिन्दा उम्मीदें कभी ढीली नहीं होती।
हर गाने वाले की आवाज़ सुरीली नहीं होती ,मुर्दे ने भी जिंदगी पूरी जी ली नहीं होती।
मिट्टी के पुतले में जान नहीं होती , बिन कलम कागज के पन्नों की पहचान नहीं होती।
जहन में दबी हर बात हमेशा बयाँ नहीं होती ,हर राहगीर की राह आसान नहीं होती।
जब खोई हुई चीज़ अपनी नहीं होती ,जब सपनों की माला जपनी नहीं होती।
जिंदगी जब आसान होने लगती ,मुस्कुराती हुई खिखिलाते हुए दिल से बातें करने लगती।
किताबों की हर लाइन रटनी नहीं होती,खूबसूरत लड़कियां आसानी से पटनी नहीं होती ।
ईमानदारी की जात नहीं होती,हर किसी के खून में वो बात नहीं होती।
भूख कभी भूखे की जात नहीं देखती ,प्यास कभी प्यासे का बाप देखती।
मौत कभी कानून के लम्बे हाँथ नहीं देखती ,अकेले का दुनिया कभी साथ नहीं देखती।
अच्छे काम करने वालों का दुनिया कभी हाँथ(लकीरें) नहीं देखती जैसे उगे हुए सूरज को कभी रात नहीं देखती।
खून की १ बूँद भी जैसे पानी नहीं होती ,हर बात में कहानी नहीं होती।
जब रोती हुईं आँखें गीली नहीं होती,तब दिल और दिमाग ने जख्मों की घूंटी पी ली नहीं होतीं।
जैसे डायबिटिक की चाय मीठी नहीं होती ,हर राहगीर की राह सीधी नहीं होती।
मौत को सामने खड़ा देख जवानों की पैंट गीली नहीं होती ,जिन्दा उम्मीदें कभी ढीली नहीं होती।
हर गाने वाले की आवाज़ सुरीली नहीं होती ,मुर्दे ने भी जिंदगी पूरी जी ली नहीं होती।
मिट्टी के पुतले में जान नहीं होती , बिन कलम कागज के पन्नों की पहचान नहीं होती।
जहन में दबी हर बात हमेशा बयाँ नहीं होती ,हर राहगीर की राह आसान नहीं होती।
जब खोई हुई चीज़ अपनी नहीं होती ,जब सपनों की माला जपनी नहीं होती।
जिंदगी जब आसान होने लगती ,मुस्कुराती हुई खिखिलाते हुए दिल से बातें करने लगती।
किताबों की हर लाइन रटनी नहीं होती,खूबसूरत लड़कियां आसानी से पटनी नहीं होती ।
ईमानदारी की जात नहीं होती,हर किसी के खून में वो बात नहीं होती।
भूख कभी भूखे की जात नहीं देखती ,प्यास कभी प्यासे का बाप देखती।
मौत कभी कानून के लम्बे हाँथ नहीं देखती ,अकेले का दुनिया कभी साथ नहीं देखती।
अच्छे काम करने वालों का दुनिया कभी हाँथ(लकीरें) नहीं देखती जैसे उगे हुए सूरज को कभी रात नहीं देखती।
Subscribe to:
Posts (Atom)